सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला और ट्रंप का पलटवार

Trump ने टैरिफ घटाया!

यह पूरा विवाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शुरू हुआ। कोर्ट ने ट्रंप के पहले लगाए गए व्यापक टैरिफ को गैरकानूनी और संविधान के खिलाफ घोषित कर दिया था। कोर्ट का कहना है कि राष्ट्रपति को इस तरह के उच्च शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है, यह शक्ति केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है।

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से IEEPA नाम के आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। इससे अमेरिकी व्यापार नीति में व्यापक बदलाव की राह खुल गई थी। लेकिन ट्रंप ने जल्दी ही धारा 122 का उपयोग कर एक नया टैरिफ लागू कर दिया, जो अस्थायी रूप से 10% लागत बढ़ाएगा।

ट्रंप का कहना है कि कोर्ट के फैसले के बावजूद वह अपने व्यापारिक एजेंडे से पीछे नहीं हटेंगे और अमेरिका को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थितियों में लाने के लिए कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि यह 10% दर “अभी लागू” होगी, और आवश्यकता पड़ने पर इसे बदला भी जा सकता है।

भारत पर असर: टैरिफ 10% से लागू, निर्यातकों को राहत

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, भारत समेत सभी व्यापारिक भागीदारों को नए 10% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा, भले ही पहले उनसे अलग दर पर समझौता किया गया हो। इसका मतलब है कि हाल ही में भारत-अमेरिका के बीच बातचीत के दौरान तय किए गए उच्च टैरिफ दर अब 10% तक सीमित होंगे, जिससे भारतीय उत्पादों पर उच्च शुल्क का बोझ कम हुआ माना जा रहा है।

पहले भारत पर कुछ उत्पादों पर उच्च शुल्क (जैसे 18% या इससे ऊपर) लागू था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले और नए आदेश के बाद वह केवल 10% तक रह गया है, जब तक कि अमेरिका और भारत बीच कोई और विशेष समझौता नहीं होता। यह राहत भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक खबर मानी जा रही है, खासकर उन उद्योगों के लिए जिनका निर्यात अमेरिका में बड़े पैमाने पर होता है।

निर्यातक और व्यापार विश्लेषक मानते हैं कि इससे भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, क्योंकि अब अमेरिकी बाजार में कम शुल्क देना होगा। हालांकि, यह 10% दर अस्थायी है और भविष्य में बढ़ाई या घटाई भी जा सकती है, खासकर अगर अमेरिका नए व्यापार जांचों के आधार पर अलग शुल्क लगाता है।

ट्रंप के इस फैसले से वैश्विक व्यापार समुदाय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इससे व्यापार युद्ध की स्थितियाँ और भी जटिल हो सकती हैं, खासकर उन देशों के लिए जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। कई वित्तीय विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह के टैरिफ उपाय दुनिया भर के निर्यात-आयात संबंधों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर डाल सकते हैं।

कुछ देशों और व्यापार समूहों ने इस फैसले से नाराज़गी जताई है और कहा है कि यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) नियमों के खिलाफ हो सकता है या इससे दीर्घकालिक व्यापार समझौतों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं कुछ उद्योग समूह इसे “घरेलू सुरक्षा और रोजगार की रक्षा” के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं।

निष्कर्ष

🔹 अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ को रद्द कर दिया, लेकिन
🔹 ट्रंप ने नए आदेश के तहत 24 फरवरी से 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया,
🔹 जो अगले 150 दिनों तक लागू रहेगा,
🔹 इसमें भारत समेत सभी देशों के आयात शामिल हैं,
🔹 यह कदम वैश्विक व्यापार नीतियों को बदल सकता है और निर्यातकों पर असर डाल सकता है।