US और Israel के मिसाइल हमले से हिल गई ईरान की धरती – खामेनेई को रातोंरात छुपाया गया सुरक्षित ठिकाने में

तेहरान जल उठा! US + Israel का बड़ा हमला"

नई दिल्ली: शनिवार की रात दुनिया ने एक ऐसा मंजर देखा जिसकी आशंका तो बहुत दिनों से थी, लेकिन जब यह हकीकत बनी तो पूरी दुनिया सन्न रह गई। US और Israel ने मिलकर ईरान पर एक साथ मिसाइल हमला कर दिया। तेहरान के कई इलाकों में भीषण विस्फोट हुए, आसमान में धुएं के गुबार उठे और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को तुरंत एक गुप्त सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। मध्य पूर्व में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य टकराव शुरू हो चुका है।

इजरायल ने क्यों किया प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक?

US और Israel के बीच ईरान को लेकर लंबे समय से रणनीतिक सहमति बन रही थी। इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर इजराइल कैट्ज ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि इजराइल ने ईरान के विरुद्ध एक प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक शुरू की है। उनका कहना था कि यह हमला इजराइल की सुरक्षा के लिए अनिवार्य था, क्योंकि ईरान किसी भी वक्त इजराइल पर बड़े मिसाइल और ड्रोन हमले कर सकता था।

कैट्ज ने पूरे इजराइल में होम फ्रंट स्पेशल इमरजेंसी घोषित कर दी। सिविल डिफेंस लॉ के तहत उन्होंने एक विशेष आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिससे पूरे देश को युद्धकालीन तैयारियों में डाल दिया गया। इजराइली नागरिकों को बंकरों में जाने के निर्देश दिए गए। इजराइल-ईरान युद्ध की यह आशंका अब सच्चाई में बदल चुकी थी।

तेहरान में क्या हुआ उस रात?

ईरान पर अमेरिका और इजराइल का हमला एक साझा सैन्य अभियान था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान में राष्ट्रपति भवन परिसर को भी निशाना बनाया गया। शहर के कई हिस्सों में एक साथ धमाके हुए। स्थानीय मीडिया के अनुसार रात के अंधेरे में लोग घरों से बाहर निकल आए, सड़कों पर अफरातफरी मच गई।

ईरान न्यूक्लियर प्रोग्राम पर पहले से चल रही बातचीत पूरी तरह विफल हो चुकी थी। अमेरिकी और इजराइली खुफिया एजेंसियों को आशंका थी कि ईरान जल्द ही परमाणु हथियार बना सकता है। इसी को रोकने के लिए ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की गई। यह मिडिल ईस्ट संकट अब एक खुले युद्ध की शक्ल ले चुका था।

अमेरिका-ईरान बातचीत क्यों विफल हुई?

अमेरिका ईरान परमाणु समझौता की कोशिशें फरवरी 2026 में शुरू हुई थीं। दोनों देश एक ऐसे युद्ध को टालना चाहते थे जो पूरे मध्य पूर्व को तबाह कर सकता था। ईरान ने संकेत दिया था कि अगर अमेरिका आर्थिक पाबंदियां हटाता है तो वह अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने पर विचार कर सकता है।

लेकिन इजराइल इस डील के खिलाफ था। उसकी मांग थी कि सिर्फ न्यूक्लियर फ्यूल बनाने की प्रक्रिया को सीमित करना काफी नहीं, बल्कि ईरान की सभी न्यूक्लियर फैसिलिटी को पूरी तरह नष्ट किया जाए। इसके अलावा इजराइल ने अमेरिका पर दबाव डाला कि बातचीत में ईरान का मिसाइल प्रोग्राम भी शामिल किया जाए।

ईरान ने मिसाइल मुद्दे को परमाणु वार्ता से जोड़ने से साफ इनकार कर दिया। इसी गतिरोध के चलते बातचीत टूट गई और ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर पहुंच गया।

ईरान की चेतावनी और पड़ोसी देशों को संदेश

ईरान और इजराइल युद्ध से पहले तेहरान ने कड़ी चेतावनी दी थी। ईरान ने कहा था कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह जवाबी हमला करेगा। इतना ही नहीं, उसने अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले पड़ोसी देशों को भी आगाह किया था कि अगर अमेरिका ने पहले हमला किया तो उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा।

मध्य पूर्व में युद्ध का यह खतरा अब और भी वास्तविक लग रहा है। खाड़ी देश अलर्ट पर हैं। इराक, सीरिया और लेबनान में भी हलचल शुरू हो गई है। तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से उछल रही हैं और तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?

US Israel Iran war का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। भारत के लाखों नागरिक ईरान, इजराइल और खाड़ी देशों में काम करते हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत में भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। संयुक्त राष्ट्र ने भी आपातकालीन बैठक बुलाई है और तत्काल युद्धविराम की अपील की है। ईरान पर हमला 2026 एक ऐसी घटना है जो वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को लंबे समय तक प्रभावित करेगी।