नई दिल्ली: शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान में उस वक्त दहशत फैल गई जब US और Israel के जॉइंट ऑपरेशन के तहत इजराइल ने पहले हमले शुरू किए। शहर के ऊपर घना काला धुआं छा गया, सड़कों पर लोग अपनी गाड़ियां लेकर भागने लगे। ईरान ने तुरंत मोबाइल सर्विस और एयरस्पेस बंद कर दिया। पूरे इलाके में युद्ध जैसे हालात बन गए।
तेहरान में क्या हुआ उस दोपहर?
इजराइली एयर स्ट्राइक के बाद तेहरान के कई इलाकों में एक साथ जोरदार धमाके सुनाई दिए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा था कि आसमान में धुएं के बड़े-बड़े गुबार उठ रहे थे। सड़कों पर लोग घबराए हुए इधर-उधर भाग रहे थे। गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं क्योंकि लोग धमाकों वाली जगहों से जितनी जल्दी हो सके दूर जाना चाहते थे।
🚨 Smoke rising across Iran’s capital Tehran following Israeli strikes. pic.twitter.com/827ehrAMCW
— Global News & Geopolitics 🌍 (@GlobalNewsGeo) February 28, 2026
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हमला सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस के पास हुआ। एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि 86 साल के खामेनेई उस वक्त तेहरान में मौजूद नहीं थे और उन्हें पहले ही एक गुप्त सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। तेहरान में धमाके 2026 की ये खबर देखते ही देखते पूरी दुनिया में फैल गई।
US और Israel का जॉइंट ऑपरेशन
सूत्रों के अनुसार यह कोई अकेले इजराइल का हमला नहीं था। US और Israel का जॉइंट ऑपरेशन पहले से तैयार था। अमेरिका ने पहले ही इस इलाके में फाइटर जेट और वॉरशिप का एक बड़ा बेड़ा इकट्ठा कर लिया था। यह सब वॉशिंगटन की उस रणनीति का हिस्सा था जिसमें ईरान पर न्यूक्लियर डील के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
इजराइली डिफेंस मिनिस्टर इजराइल काट्ज़ ने हमले को इजराइल की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला खतरों को दूर करने के लिए किया गया। इजराइली मिलिट्री ने पहले ही जनता को प्रोएक्टिव अलर्ट जारी कर दिया था। पूरे इजराइल में सायरन बजने लगे और नागरिकों को बंकरों में जाने के निर्देश दिए गए।
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— Tehran Times (@TehranTimes79) February 28, 2026
ट्रंप की डील और ईरान का इनकार
अमेरिका ईरान न्यूक्लियर डील को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप काफी समय से सक्रिय थे। ट्रंप चाहते थे कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करे और इसके बदले आर्थिक पाबंदियों से राहत दी जाए। ईरान में चल रहे आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रंप को यह एक सुनहरा मौका लग रहा था।
लेकिन ईरान ने साफ कहा था कि उसे यूरेनियम एनरिचमेंट का पूरा अधिकार है। इसके अलावा ईरान ने हमास और हिजबुल्लाह जैसे हथियारबंद गुटों को समर्थन देने और अपने लॉन्ग रेंज मिसाइल प्रोग्राम पर किसी भी बातचीत से मना कर दिया था। इसी गतिरोध ने अमेरिका ईरान तनाव को उस बिंदु तक पहुंचा दिया जहां से युद्ध अनिवार्य हो गया।
एयरस्पेस बंद, फ्लाइट्स रद्द
हमले के तुरंत बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। तेल अवीव और अम्मान से आने-जाने वाली फ्लाइट्स को रूट बदलना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने ईरान के ऊपर से उड़ान भरने से मना कर दिया। मोबाइल सर्विस बंद होने से तेहरान के अंदर से खबरें आनी बंद हो गईं जिससे बाहर की दुनिया में और ज्यादा दहशत फैल गई।
मध्य पूर्व में युद्ध के इस नए दौर ने वैश्विक उड़ान मार्गों को भी प्रभावित किया। कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ने लगीं जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका है।
ईरान की चेतावनी – अमेरिकी बेस पर जवाबी हमले का ऐलान
ईरान ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। तेहरान ने अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले पड़ोसी देशों को स्पष्ट संदेश दिया था कि अगर वॉशिंगटन ने हमला किया तो उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
अब जब इजराइल ईरान युद्ध शुरू हो चुका है तो इराक, सीरिया, जॉर्डन और खाड़ी देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं। तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने आपातकालीन बैठक बुलाई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
