पश्चिम एशिया एक बार फिर भीषण युद्ध की आग में झुलसता नजर आ रहा है। इज़राइल और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी अब सीधे युद्ध में बदल चुकी है। फरवरी 2026 के आख़िरी सप्ताह में हालात उस वक्त बेहद गंभीर हो गए, जब इज़राइल ने ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी इज़राइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर जोरदार पलटवार किया।
कैसे शुरू हुआ ताज़ा टकराव
इज़राइल और ईरान के बीच तनाव कोई नया नहीं है। बीते कई वर्षों से दोनों देश एक-दूसरे पर परोक्ष हमले, साइबर अटैक और प्रॉक्सी संगठनों के जरिए वार करते रहे हैं। इज़राइल का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो उसके अस्तित्व के लिए सीधा खतरा है। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और इज़राइल क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहा है।
फरवरी 2026 में हालात तब बेकाबू हो गए जब इज़राइल ने “रोकथाम कार्रवाई” के नाम पर ईरान के भीतर कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमला कर दिया। इन हमलों में मिसाइल बेस, कमांड सेंटर और रक्षा से जुड़ी संरचनाओं को निशाना बनाया गया।
ईरान पर इज़राइली हमले
इज़राइली वायुसेना और मिसाइल यूनिट्स ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में एक साथ हमले किए। चश्मदीदों के मुताबिक, तेहरान में तेज धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं और कई इलाकों में धुएं के गुबार उठते देखे गए। ईरान ने तुरंत अपनी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी, लेकिन फिर भी कुछ अहम ठिकानों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं।
इज़राइल का दावा है कि यह हमला “पूर्व-रक्षात्मक” था और इसका मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था, ताकि भविष्य में बड़े खतरे को टाला जा सके।
ईरान का जोरदार जवाब
इज़राइली हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान की ओर से दर्जनों मिसाइलें इज़राइल की दिशा में दागी गईं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया गया। इज़राइल में कई शहरों में सायरन बजने लगे और नागरिकों को बंकरों में जाने की चेतावनी दी गई।
ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने साफ शब्दों में कहा कि “इस हमले का जवाब बिना किसी नरमी के दिया जाएगा।” ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया।
आम नागरिकों पर असर
इस युद्ध का सबसे बड़ा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। दोनों देशों में आपात स्थिति लागू कर दी गई है।
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इज़राइल में स्कूल, कॉलेज और दफ्तर बंद कर दिए गए हैं।
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ईरान में कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं सीमित कर दी गई हैं और नागरिकों से घरों में रहने की अपील की गई है।
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शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों तरफ कई लोग घायल हुए हैं और कुछ की मौत की भी आशंका जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रूस और चीन ने इज़राइल और अमेरिका की कार्रवाई की निंदा करते हुए संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई है, जिसमें युद्धविराम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया जा रहा है।
यूरोपीय देशों ने भी हालात पर चिंता जताई है और कहा है कि अगर यह युद्ध और फैला तो पूरी दुनिया को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इज़राइल–ईरान युद्ध का असर सिर्फ सैन्य या राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक भी है।
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कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।
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सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ गई है।
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शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला, तो वैश्विक महंगाई और ऊर्जा संकट और गहराता जा सकता है।
भारत समेत अन्य देशों की चिंता
भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे सतर्क रहें, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। भारतीय दूतावास हालात पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर मदद का भरोसा दिलाया गया है।
आगे क्या?
फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और किसी भी बड़े टकराव से इनकार नहीं किया जा सकता। कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीन पर हालात तेजी से बदल रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही युद्धविराम नहीं हुआ, तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है, जिसमें कई अन्य देश और संगठन भी शामिल हो सकते हैं।
निष्कर्ष
इज़राइल और ईरान के बीच यह ताज़ा युद्ध सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि दुनिया कूटनीति के जरिए शांति की ओर बढ़ती है या यह संघर्ष और भी भयावह रूप ले लेता है।
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