जनवरी में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप खुद को एक “शांतिदूत” के रूप में पेश करते रहे हैं — ऐसा व्यक्ति जो दुनिया भर में चल रहे “युद्धों” को खत्म करने के मिशन पर है। लेकिन हकीकत में राष्ट्रपति ट्रंप अपने सहयोगियों और विरोधियों दोनों के खिलाफ अपनी ही लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं। पाकिस्तान के मदरसे-प्रशिक्षित ‘फील्ड मार्शल’ असीम मुनीर को खुश करने, ईरान पर बमबारी करने, भारत और चीन सहित कई देशों के खिलाफ टैरिफ युद्ध छेड़ने और रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में विफल रहने के बाद, अब ट्रंप का नया जुनून है
— परमाणु परीक्षण।
29 अक्टूबर को डोनाल्ड ट्रंप ने पेंटागन को निर्देश दिया कि वह तुरंत परमाणु हथियारों के परीक्षण बढ़ाए और रूस तथा चीन जैसे देशों की बराबरी करे।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से पहले ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं और अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने इन हथियारों का “पूर्ण नवीनीकरण” करवाया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह करना “नफरत” थी, लेकिन “कोई विकल्प नहीं था।” ट्रंप ने आगे कहा कि रूस और चीन जैसे देशों के परमाणु परीक्षण कार्यक्रमों को देखते हुए, उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया है कि अमेरिका भी समान स्तर पर परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू करे।
ट्रंप ने लिखा —
“संयुक्त राज्य अमेरिका के पास किसी भी देश की तुलना में अधिक परमाणु हथियार हैं। यह मेरे पहले कार्यकाल में मौजूदा हथियारों के पूर्ण अपडेट और नवीनीकरण के साथ पूरा हुआ। इसकी भयानक विनाशकारी शक्ति के कारण, मुझे यह करना पसंद नहीं था, लेकिन कोई और रास्ता नहीं था! रूस दूसरे नंबर पर है, और चीन तीसरे स्थान पर, लेकिन 5 वर्षों में बराबरी कर सकता है। अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों को देखते हुए, मैंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को हमारे परमाणु हथियारों का समान स्तर पर परीक्षण शुरू करने का निर्देश दिया है। यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी। इस विषय पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद! — राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप”
ट्रंप का यह आदेश उस समय आया है जब कुछ दिन पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यह घोषणा की थी कि रूस ने अपने “अद्वितीय” परमाणु-संचालित बुरेवेस्निक (Burevestnik) क्रूज़ मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है।
अब ट्रंप ने अमेरिका में परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने के अपने फैसले पर और जोर दिया है। CBS 60 Minutes को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भले ही अमेरिका के पास इतनी ताकत है कि वह “दर्जनों देशों को मिटा” सकता है, लेकिन रूस और चीन की परमाणु महत्वाकांक्षाएँ ही अमेरिका के फिर से परीक्षण शुरू करने का मुख्य कारण हैं।
