नई दिल्ली: कार्तिक पूर्णिमा सनातन धर्म की सबसे पवित्र पूर्णिमाओं में से एक मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस पर्व का विशेष महत्व दीपदान, पवित्र स्नान, व्रत और पूजा-अर्चना के लिए माना जाता है।
इसी दिन देव दीपावली, गुरु नानक जयंती और तुलसी विवाह जैसे प्रमुख पर्व भी मनाए जाते हैं, जिससे कार्तिक पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा 2025: 4 या 5 नवंबर?
हिंदू पंचांग के अनुसार:
- कार्तिक पूर्णिमा – 5 नवंबर 2025 (बुधवार)
- पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय – शाम 5:11 बजे
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 4 नवंबर 2025 रात 10:36 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त – 5 नवंबर 2025 शाम 6:48 बजे
इस अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य व्रत और पूजा 5 नवंबर 2025 को की जाएगी।
कार्तिक पूर्णिमा क्यों विशेष है?
- इसे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमा माना जाता है
- इस दिन व्रत रखने से अत्यंत पुण्य प्राप्त होता है
- दीपदान करने से पापों का नाश होता है और समृद्धि मिलती है
- 365 बाती वाला दीपक जलाने से पूरे वर्ष किए गए सभी धार्मिक कार्यों का फल मिलता है
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान कैसे करें?
1. पवित्र स्नान
यदि संभव हो तो गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें
नदी स्नान संभव न हो तो स्नान के पानी में गंगाजल मिलाएँ
2. इन स्थानों पर दीप जलाएँ
तुलसी के पौधे के नीचे
घर के मंदिर में या किसी नजदीकी मंदिर में
घर के आंगन या मुख्य द्वार पर
विशेष रूप से 365-बाती का दीपक जलाना बहुत शुभ माना गया है, जो पूरे वर्ष के लिए सौभाग्य और आशीर्वाद लाता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी विवाह
देव उठनी एकादशी से शुरू हुआ तुलसी विवाह समारोह कार्तिक पूर्णिमा के दिन संपन्न होता है। इस दिन भक्त देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम का प्रतीकात्मक विवाह करते हैं।
इसी दिन भीष्म पंचक व्रत का भी समापन होता है।
