डब्बा ट्रेडिंग: निवेश की दुनिया में इन दिनों एक शब्द काफी चर्चा में है – यह एक ऐसा तरीका है जो देश में कानूनी तौर पर पूरी तरह बैन है, फिर भी कई लोग अवैध तरीके से इसके जरिए बाजार में पैसा लगा रहे हैं। डब्बा ट्रेडिंग को बॉक्स ट्रेडिंग या बकेट ट्रेडिंग के नाम से भी जाना जाता है।
यह कारोबार आधिकारिक स्टॉक एक्सचेंजों (जैसे NSE, BSE) के बाहर, गैरकानूनी तरीके से होता है। हिंदी में ‘डब्बा’ का अर्थ ‘बॉक्स’ होता है, जो इस बिना नियमों वाले और छिपे हुए कारोबार को दर्शाता है।
डब्बा ट्रेडिंग कैसे काम करती है?
डब्बा ट्रेडिंग का मुख्य उद्देश्य वास्तविक शेयरों की खरीद-बिक्री किए बिना, उनकी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर सट्टा लगाना होता है।
1. डब्बा ऑपरेटर और निपटान (Settlement)
गैर-पंजीकृत लेनदेन: डब्बा ऑपरेटर (ब्रोकर) निवेशकों के बीच लेन-देन का निपटान अपने स्तर पर ही करते हैं।
कोई सरकारी निगरानी नहीं: इससे ये सौदे स्टॉक एक्सचेंज और सरकारी नियामक सेबी (SEBI) की निगरानी से पूरी तरह बाहर रहते हैं।
जुए जैसा कारोबार: आसान भाषा में, यह शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर आधारित एक तरह का जुआ है।
2. ब्रोकर की भूमिका
खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ना: डब्बा ब्रोकर डब्बा बाजार में एक ही स्टॉक में रुचि रखने वाले खरीदारों और विक्रेताओं को ढूंढकर उन्हें जोड़ते हैं।
कमीशन कमाना: सौदा पूरा होने पर, ब्रोकर सौदे की कीमत का एक हिस्सा कमीशन के रूप में लेता है।
कागजी या वर्चुअल प्लेटफॉर्म: ये सौदे अक्सर कागज पर या कभी-कभी वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर किए जाते हैं ताकि ट्रेडिंग का अनुभव वास्तविक लगे।
3. सट्टेबाजी का तरीका
कीमतों में बदलाव पर दाँव: व्यापारी यह अनुमान लगाते हैं कि किसी शेयर की कीमत कितनी बढ़ेगी या गिरेगी और उसी आधार पर ब्रोकर के साथ दाँव लगाते हैं।
उदाहरण: यदि व्यापारी XYZ दाँव लगाता है कि शेयर XYZ की कीमत एक सप्ताह में ₹300 से बढ़कर ₹350 हो जाएगी।
मुनाफा: अगर कीमत ₹350 तक पहुंचती है, तो व्यापारी XYZ को मुनाफा होगा।
नुकसान: अगर कीमत गिरकर ₹250 हो जाती है, तो व्यापारी को नुकसान होगा और ब्रोकर उसके नुकसान से कमाई करेगा।
डब्बा ट्रेडिंग में शामिल प्रमुख जोखिम (Risks)
डब्बा ट्रेडिंग में शामिल होना निवेशकों के लिए बेहद खतरनाक है। ऑनलाइन डब्बा ट्रेडिंग ऐप्स की बढ़ती संख्या नए निवेशकों को इन गैरकानूनी तरीकों की ओर आकर्षित कर रही है, लेकिन इसके जोखिम बहुत बड़े हैं:
धोखाधड़ी का अधिक खतरा: इसमें धोखा, गलत कीमतें दिखाना और ऑपरेटर द्वारा मनमर्जी से सौदे बदलना जैसी चीज़ें आसानी से हो सकती हैं।
कानूनी मदद का अभाव: चूँकि यह आधिकारिक सिस्टम से बाहर चलता है, किसी भी झगड़े या धोखाधड़ी की स्थिति में निवेशकों के पास कानूनी मदद लेने का कोई रास्ता नहीं होता। स्टॉक एक्सचेंज द्वारा दिए जाने वाले शिकायत समाधान तंत्र का लाभ नहीं मिलता।
पैसे डूबने का खतरा: निवेश किया गया पूरा पैसा डूब सकता है, क्योंकि ऑपरेटर केवल कागज पर ही लेन-देन करते हैं, और उनके दिवालिया होने पर निवेशकों को कुछ नहीं मिलता।
कानूनी कार्रवाई का जोखिम: इसमें शामिल होने पर अधिकारियों की ओर से जुर्माना, दंड या आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है, क्योंकि यह कानून के खिलाफ है।
निवेशकों के लिए ज़रूरी सलाह
डब्बा ट्रेडिंग वित्तीय बाजारों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती है और निवेशकों को भारी जोखिम में डालती है।
सभी व्यापारियों और निवेशकों को इस तरह की अवैध गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए

