Exclusive वामपंथी आतंक को खत्म करने की ओर बढ़ी मोदी सरकार, RTI के आँकड़े दे रहे गवाही: 2014 से हजारों का सरेंडर

Exclusive: Modi Government Moves Closer to Ending Left-Wing Extremism

Exclusive : गृह मंत्रालय के आरटीआई आँकड़ों से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ 2014 से 6,000 से अधिक आत्मसमर्पण नक्सलियों ने किए हैं जबकि 1,100 नक्सलियों को मौत के घाट उतार दिया गया। भारत के नक्सल विरोधी अभियानों में छत्तीसगढ़ अग्रणी है। गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद के खात्मे का लक्ष्य रखा है।

11 साल में नक्सलवाद का अंत करीब: गृह मंत्रालय के आँकड़े बताते हैं मोदी सरकार की सख्त रणनीति का असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुँच चुका है। ‘रेड कॉरिडोर’ कहलाने वाले इलाकों में वामपंथी उग्रवाद (LWE) की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। गृह मंत्रालय द्वारा ऑपइंडिया की आरटीआई के जवाब में साझा किए गए आँकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं।

छत्तीसगढ़ बना केंद्र बिंदु: सबसे ज्यादा आत्मसमर्पण और मारे गए नक्सली

मई 2014 से 30 सितंबर 2025 तक छत्तीसगढ़ में कुल 6,153 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 1,129 नक्सली मारे गए — जो देशभर में सबसे ज्यादा हैं।
वर्ष 2016 में 1,440 आत्मसमर्पण के साथ रिकॉर्ड बना, जबकि 2025 में (30 सितंबर तक) सबसे अधिक 311 नक्सली मारे गए। ये आँकड़े सुरक्षा एजेंसियों की सफल रणनीति और खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों की सफलता को दर्शाते हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ऑपरेशन कगार’ के तहत मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है।

10 राज्यों के आँकड़े उजागर

आरटीआई के अनुसार, मई 2014 से अब तक 8,751 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 1,801 नक्सली मारे गए।
इस दौरान 548 सुरक्षा बलों के जवानों ने शहादत दी और 1,630 नागरिकों की मौत हुई। वहीं, 5,277 हथियार बरामद किए गए।
ये आँकड़े केंद्र सरकार की समन्वय, विकास और पुनर्वास नीति की सफलता को दर्शाते हैं। गृह मंत्री शाह ने हाल ही में कहा था कि नक्सलवाद अब सिर्फ 3 जिलों तक सीमित रह गया है।

छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा बदलाव

छत्तीसगढ़ लंबे समय से नक्सल आंदोलन का मुख्य गढ़ रहा है।

रमन सिंह के शासन (2014–2018) में 2,697 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 408 मारे गए।

कांग्रेस सरकार (भूपेश बघेल व अजीत जोगी, 2018–2023) के दौरान आत्मसमर्पण घटकर 2,019 और मारे गए नक्सली 228 रह गए।

दिसंबर 2023 में विष्णुदेव साय की सरकार आने के बाद, सितंबर 2025 तक 1,887 आत्मसमर्पण और 493 नक्सली मारे गए।

यह आँकड़ा बताता है कि केंद्र और राज्य में भाजपा सरकारों के बेहतर तालमेल से नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती मिली है।

अन्य राज्यों में स्थिति में सुधार

झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में नक्सली गतिविधियों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। पश्चिम बंगाल और केरल में तो अब घटनाएँ लगभग समाप्त हो चुकी हैं। इससे साफ है कि ‘रेड कॉरिडोर’ अब सिकुड़कर सीमित इलाकों तक रह गया है।

2016 में सर्वाधिक आत्मसमर्पण, 2025 में न्यूनतम नक्सली गतिविधियाँ

वर्ष 2016 आत्मसमर्पण का चरम वर्ष रहा, जो सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है।
वहीं, 2025 में नक्सली गतिविधियाँ सबसे कम दर्ज हुईं। इसका श्रेय सटीक खुफिया जानकारी, तकनीकी सहायता और प्रभावी समन्वय को जाता है।

सुरक्षा बलों का बलिदान और नक्सलियों की कमर टूटी

मई 2014 से अब तक 548 जवानों ने देश के लिए प्राण न्योछावर किए। हालाँकि, हाल के वर्षों में यह संख्या घट रही है।
लगातार आत्मसमर्पण और हथियार बरामदगी से नक्सलियों की रीढ़ टूट चुकी है। 5,277 हथियारों की बरामदगी से उनकी पुनर्गठन की क्षमता बेहद सीमित हो गई है।

मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की उम्मीद

आज नक्सलवाद सिर्फ कुछ चुनिंदा जंगल क्षेत्रों तक सिमट गया है।
सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूर्ण सफाया किया जाए।
दूरसंचार, विकास योजनाओं, पुनर्वास और लगातार आत्मसमर्पण कर रहे नक्सलियों को देखते हुए उम्मीद है कि यह लक्ष्य तय समय से पहले ही पूरा हो सकता है।

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