ट्रंप की धमकी बेअसर: अक्टूबर में रूस से बढ़ा भारत का तेल आयात, 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुँचा स्तर

India Increases Russian Oil Imports in October Despite Pressure from Donald Trump Administration

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने के लिए डाले जा रहे दबाव का फिलहाल कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।

ट्रंप प्रशासन ने भारत के कुछ निर्यात उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बावजूद अक्टूबर 2025 में भारत ने रूस से तेल आयात और बढ़ा दिया।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कैपलर (Kpler) और ऑयलएक्स (OilX) के शिपिंग डेटा बताते हैं कि अक्टूबर में रूस से भारत को औसतन 1.48 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तेल की आपूर्ति हुई, जबकि सितंबर में यह आंकड़ा 1.44 मिलियन बैरल प्रतिदिन था।

वहीं, कैपलर के अनुसार कुल आयात 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुँच गया, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 34% है। इस तरह रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है।

21 नवंबर तक छूट, फिर घटेगा आयात

रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने हाल ही में रूस की दो बड़ी कंपनियों — लुकोइल (Lukoil) और रोसनेफ्ट (Rosneft) — पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन कंपनियों को 21 नवंबर तक अपना कारोबार बंद करने की समय-सीमा दी गई है। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने नई बुकिंग रोक दी है और स्पॉट मार्केट से वैकल्पिक सप्लाई की तलाश शुरू कर दी है।

कैपलर के विश्लेषक सुमित रितोलिया के मुताबिक, नवंबर के पहले तीन हफ्तों तक रूसी तेल का आयात उच्च स्तर पर रहेगा, लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट देखने को मिलेगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, एमआरपीएल (MRPL) और एचपीसीएल मित्तल एनर्जी ने रूसी तेल की नई खरीद अस्थायी रूप से रोक दी है।

एमआरपीएल ने ग्लेनकोर (Glencore) से 2 मिलियन बैरल अबू धाबी का मुरबान क्रूड खरीदा है, जो दिसंबर की आपूर्ति के लिए रूसी तेल की जगह लेगा। वहीं, इंडियन ऑयल ने अमेरिका से 2026 की पहली तिमाही के लिए 24 मिलियन बैरल तेल खरीदने का टेंडर जारी किया है।

भारत अभी भी रूस का सबसे बड़ा खरीदार

साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से भारत रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच भारत ने औसतन 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदा, जो रूस के कुल निर्यात का 40% हिस्सा है।
सस्ता तेल मिलने से भारत को पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रखने में मदद मिली।

अब ट्रंप सरकार के दबाव के बावजूद भारत आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि नवंबर के बाद रूस से आयात में गिरावट की संभावना है।
यदि भारत वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदेगा, तो तेल बिल में 9–11 बिलियन डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है।

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