भारत-जॉर्डन संबंध: पीएम मोदी को क्राउन प्रिंस ने खुद ड्राइव कर म्यूजियम पहुंचाया, दिखी रिश्ते की अभूतपूर्व गर्मजोशी

भारत-जॉर्डन संबंध: पीएम मोदी को क्राउन प्रिंस ने खुद ड्राइव कर म्यूजियम पहुंचाया, दिखी रिश्ते की अभूतपूर्व गर्मजोशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जॉर्डन यात्रा ने भारत-जॉर्डन संबंध के 75 साल पुराने राजनयिक रिश्तों में एक नया और गर्मजोशी भरा अध्याय जोड़ दिया है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय सहयोग के लिहाज़ से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इसके दौरान दिखा आपसी सम्मान और विश्वास का एक ऐसा अनोखा नज़ारा, जिसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।

विश्वास और गर्मजोशी का ऐतिहासिक नज़ारा

पीएम मोदी अपनी चार-दिवसीय, तीन-देशों की यात्रा के पहले पड़ाव के रूप में जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचे थे। उनके दो दिवसीय जॉर्डन दौरे का दूसरा दिन, मंगलवार, एक अविस्मरणीय पल का गवाह बना। जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय ने स्वयं गाड़ी चलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अम्मान स्थित प्रतिष्ठित जॉर्डन म्यूजियम तक पहुंचाया।

अभूतपूर्व गर्मजोशी: क्राउन प्रिंस का यह व्यक्तिगत कदम, जो कि पैगंबर मोहम्मद की 42वीं पीढ़ी के वंशज माने जाते हैं, दोनों देशों के बीच मजबूत भरोसे और गहरे, अनौपचारिक रिश्तों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह राजनयिक प्रोटोकॉल से हटकर एक ऐसा भाव है जिसने भारत-जॉर्डन संबंध की गहराई को वैश्विक मंच पर उजागर किया।

प्रतीक: क्राउन प्रिंस द्वारा दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री को स्वयं ड्राइव कर ले जाना, आपसी सम्मान और भविष्य में सकारात्मक साझेदारी की मजबूत नींव का प्रतीक है।

पीएम मोदी ने किया जॉर्डन म्यूजियम का दौरा

अम्मान पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने रास अल-ऐन इलाके में स्थित जॉर्डन के सबसे बड़े संग्रहालय, जॉर्डन म्यूजियम का भी दौरा किया। यह दौरा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

ऐतिहासिक महत्व: साल 2014 में स्थापित यह म्यूजियम जॉर्डन के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पुरातात्विक अवशेषों का संग्रह है।

पुरातात्विक धरोहर: यहां प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक समय तक की सभ्यता की झलक मिलती है। इस संग्रह में 15 लाख साल पुराने जानवरों की हड्डियां और विश्व की सबसे पुरानी मूर्तियों में गिनी जाने वाली 9 हजार साल पुरानी ऐन गजाल की चूने से बनी मूर्तियां भी शामिल हैं।

आतंकवाद पर दोनों देशों का एक और स्पष्ट रुख

जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के मजबूत और एकजुट रुख को दोहराया।

समान सोच: प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और जॉर्डन आतंकवाद के खिलाफ एक जैसी और स्पष्ट सोच रखते हैं। इस साझा दृष्टिकोण ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।

द्विपक्षीय मुलाकात: राजा अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर हुई यह मुलाकात, दोनों देशों के 75 साल पुराने भारत-जॉर्डन संबंध को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

सहयोग और साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र

पीएम मोदी और राजा अब्दुल्ला द्वितीय के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता में द्विपक्षीय साझेदारी को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहरा और विस्तारित करने पर सहमति बनी।

प्रमुख सहमति बिंदु:

व्यापार और निवेश: आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान बढ़ाने पर जोर दिया गया।

रक्षा और सुरक्षा: रक्षा सहयोग और आतंकवाद विरोध में साझेदारी को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया।

ऊर्जा और उर्वरक: नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और उर्वरक (Fertilizer) और कृषि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना, जो भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

तकनीक और कनेक्टिविटी: आने वाले समय में डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे (Infrastructure), और लोगों के आपसी संपर्क (People-to-People Contact) को मजबूत करने पर बल दिया गया।

पर्यटन: दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया गया।

निष्कर्ष के तौर पर, यह यात्रा केवल एक राजनयिक दौरा नहीं थी, बल्कि यह भारत-जॉर्डन संबंध की अटूट दोस्ती और आपसी विश्वास का एक जीवंत प्रमाण थी, जिसने आने वाले समय में सहयोग और विकास के लिए एक ठोस मंच तैयार कर दिया है।